उत्तराखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। क्योकि प्रदेश में तीसरा मोर्चा गठन की सुगबुहाट तेज हो चुकी है, जिससे इन दोनों बड़ी पार्टियों के समीकरण बिगड़ सकते है।प्रदेश में बदलते हुए राजनीतिक हालात में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश शुरू हो गई है। रविवार को देहरादून में सपा कार्यालय में समान विचारधारा वाले छह दलों ने एक मंच पर आकर नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, फैसला लिया गया है कि समान विचारधारा वाले दलों को भी इस मंच में शामिल किया जाएगा। ताकि सशक्त तीसरा मोर्चा का गठन किया जा सके।
बैठक में यह फैसला लिया कि उत्तराखंड में नगर निकाय के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग चुनाव आयोग से की जाएगी, क्योंकि ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि चुनाव में फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दूरदर्शन और आकाशवाणी पर मन की बात कह कर गुजरात विधानसभा के चुनाव और उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। बैठक में मोदी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि इससे पहले के नगर निकाय हो या विधानसभा चुनावों में तीसरे मोर्चे का गठन किया गया, लेकिन भाजपा और कांग्रेस बड़ी पार्टियों के आगे तीसरा मोर्चा वोटो का बिभाजन में कई खास फर्क नहीं पड़ा।



