
देहरादून। अमूमन उप चुनाव सत्ता दल ही जीतता है, लेकिन इस बार यह मिथक सच साबित नहीं होगा। इसका कारण भाजपा की अंतर कलह और दावेदारों के बगावती तेवर है। थराली विधानसभा जिसके विधायक मगन लाल शाह का विगत दिनों निधन हो गया था। इस रिक्त सीट पर चुनाव होना है। जिसके लिए अंतरकलह जारी है। इस चुनाव की स्वाभाविक उत्तराधिकारी मगन लाल शाह की पत्नी मुन्नी देवी जो चमोली की जिला पंचायत अध्यक्ष भी है, को माना जा रहा था लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता बलवीर सिंह घुन्याल तथा हाल ही में पार्टी का दामन थामने वाले गुड्डू लाल शाह के बागी देवर भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं। यह भी सच है कि इस चुनाव की हार जीत से न तो सत्ता पर कोई फर्क पड़ेगा और न ही विपक्ष को कोई संजीवनी मिल जाएगी, लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर दो लोकसभा सीटें हारने के बाद जो पार्टी की किरकिरी हुई थी उसे कोई भी मुख्यमंत्री दोहराना नहीं चाहता। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी नहीं चाहते कि उप चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़े, इसके लिए उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह को इस चुनाव का प्रभारी बनाया है। इसी प्रकार मंत्रियों की पूरी फौज थराली में उतार दी गई है। किसी भी किमत पर कोई कोर कसर न रह जाए। दूसरी ओर कांग्रेस भी इस मौके को छोड़ना नहीं चाहती। पिछले चुनाव में थोड़े मतों से मात खाए डॉ. जीत राम को पुन: चुनाव मैदान में उतारा गया है। डा. जीतराम इस बार अपना बदला लेना चाहते हैं, वहीं भाजपा इस सीट को बचाए रखने के लिए पूरी तरह प्रयासरत है। लेकिन भाजपा की मुश्किलें उसके बागियों ने बढ़ा दी है।
उधर गुड्डू का कहना है कि वह प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने देहरादून में ऐलान किया कि यदि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरेंगे। वहीं, माना जा रहा कि इस सबके कारण ही पार्टी प्रत्याशी के नाम की घोषणा करने को लेकर भाजपा नेतृत्व ऊहापोह की स्थिति में है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2017 के विस चुनाव में करीब आठ हजार वोट हासिल करने वाले गुड्डू लाल शाह को भाजपा में शामिल कर जमीन मजबूत करने की कोशिश की लेकिन अब यही कोशिश उनके लिए समस्या बनती दिख रही है।
इसके साथ हीगुड्डूने बागी तेवर अख्तियार कर लिए। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने डेमेज कंट्रोल के मद्देनजर रविवार को गुड्डू लाल को वार्ता के लिए देहरादून बुलाया, मगर बात नहीं बन पाई। गुड्डू लाल शाह ने कहा कि उन्होंने अपनी बात सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के समक्ष रख दी है। गुड्डू लाल शाह ने कहा कि ‘मुझे बताया गया कि भाजपा ने प्रत्याशियों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि गुड्डू लाल शाह कोई दूध पीते बच्चे नहीं हैं। उन्होंने ने बिना शर्त पार्टी ज्वाइन की और तब कहा था कि अब वह घर लौट आए हैं। जहां तक टिकट का सवाल है तो प्रांतीय नेतृत्व ने अपना पैनल तय कर केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिया है। इसमें शाह का नाम भी है। केंद्रीय नेतृत्व जो भी फैसला लेगा, वह सभी को मान्य होगा। प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है और पार्टी के निर्णय के विरुद्ध जाना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। साथ ही पार्टी किसी दबाव में काम नहीं करती।


