Thursday, February 26, 2026
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जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी घोंचू गिरफ्तार, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दिए थे किसी भी कीमत पर गिरफ्तार करने के आदेश……

देहरादून- जहरीली शराब पीने से हुई छह मौत के जिम्मेदार अजय सोनकर उर्फ घोंचू को पुलिस ने सोमवार शाम ईसी रोड से गिरफ्तार किया। पुलिस से बचने के लिए वह अदालत में चल रहे पुराने मामलों में सरेंडर करने की कोशिश में था। पथरिया पीर में हुई मौतों के बाद बस्ती के लोगों ने चीख-चीख कर घोंचू का नाम लेना शुरू किया था तो वह देहरादून से रातोंरात फरार हो गया और भानियावाला के एक होटल छिप गया। इधर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रविवार को गृह, आबकारी और पुलिस विभाग के अधिकारियों को तलब किया था। मुख्यमंत्री रावत ने किसी भी हाल में इसमें शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए थे। अभी तक इस मामले में 2 पुलिस अधिकारी और 2 आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है।

एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने देर रात प्रेस कान्फ्रेंस कर घोंचू के गिरफ्तारी की पुष्टि की और बताया कि घोंचू पर वर्ष 2005 से लेकर अब तक कुल नौ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। इसमें से पांच शराब की तस्करी के हैं। जिस दिन पथरिया पीर में लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ, उस दिन वह जाखन स्थित अपने मकान पर था। जब उसे पता चला कि मौतों के पीछे उसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है तो वह अपने दोस्त के साथ हरिद्वार की ओर निकल गया और भानियावाला में एक होटल में जा छिपा। उसने अपने सभी मोबाइल नंबर बंद कर दिए थेए ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके। इस दौरान उसने एक नया सिमकार्ड भी खरीदा, जिससे वह अपने जीजा से पल-पल की खबर ले रहा था। जब उसे लगा कि पुलिस उसके पीछे पड़ गई है और कहीं से भी उसे ढूंढ निकालेगी तो उसने कोर्ट में सरेंडर की सोची। इसकी आशंका पहले से ही थी, लिहाजा कोर्ट के बाहर सादे वेश में पुलिस कर्मियों की तैनाती कर दी गई थी। सोमवार शाम वह अदालत परिसर तक आया भी था, लेकिन उसे जब इस बात का आभास हुआ कि पुलिस पर नजर रखे हैं तो वह ईसी रोड की ओर निकल गया। जहां उसे पीछा कर दबोच लिया गया। वहीं पूछताछ में घोंचू ने बताया कि वह कनॉट प्लेस स्थित ठेके से शराब खरीदता था। ठेके से एक पव्वा 70 रुपये में खरीद कर एजेंट को 80 रुपये में बेचता था। एजेंट उसे सौ रुपये में लोगों को बेचता था। इसके पीछे उसका तर्क था, लोगों को शराब एक तो घर पर ही मिल जाती थी, दूसरे यह कि जब ठेके बंद भी हो जाते थे तो लोगों के लिए शराब उपलब्ध रहती थी।

 

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