Saturday, February 28, 2026
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जल विद्युत परियोजनाएं भारत का भविष्य है-डी. वी. सिंह सीएमडी टीएचडीसी !

टीएचडीसी के सीएमडी डी.वी.सिंह मानते हैं कि जल विद्युत परियोजनाओं का कोई विकल्प नहीं। इसके द्वारा एकत्रित आरक्षित जल जहां उर्जा का प्रमुख विकल्प बनता है. वहीं जल आरक्षित क्षेत्र को बाढ़ जैसी भयानक विभीषिका से बचाने का काम करता है। 2013 में उत्तराखंड की बाढ़ और जल प्लावन इतना भयानक होता कि ऋषिकेश और हरिद्वार का काफी क्षेत्र प्रभावित होता और भारी जन ध्न हानि होती। इस क्षति को  टिहरी बांध् परियोजना और उनकी सहयोगी परियोजनाओं ने काफी हद तक कम कर दिया है. जिससे परियोजना ने अपनी लागत से अधिक की क्षति बचा दी। इसे दूसरे शब्दों में यूं कहा जा सकता है कि अकेली 2013 की भयानक बाढ़ की विभिषिका को रोक कर टिहरी बांध् परियोजना ने अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाई है। डी.वी.सिंह जो टीएचडीसी इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध् निदेशक है, का मानना है कि इस परियोजना ने अपने उद्देश्यों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। श्री सिंह ने ऋषिकेश टीएचडीसी आॅपिफसर क्लब में एक विशेष भेंट में बताया कि टीएचडीसी और उत्तर प्रदेश के संयुक्त उपक्रम के रूप में टीएचडीसी इंडिया की शुरूआत जुलाई 1988 में हो गई थी। 2006-07 से यह परियोजना प्रारंभ हो गई। 4000 करोड़ की पूंजी से प्रारंभ हुई यह योजना उत्तर प्रदेश और टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम के रूप में कार्य कर रही है और अब योजना का केंद्र उत्तराखंड है।
उन्होंने कहा कि हम अपने लाभांश का दो फीसदी समाज कल्याण में लगातार व्यय कर रहे हैं जो हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। इसके लिए सेवा सोसायटी तथा टीएचडीसी एजुकेशन सोसायटी को चुना गया है जिनके माध्यम से यह राशि व्यय की जा रही है। अध्यक्ष एवं महानिदेशक डी वी सिंह का मानना है कि टीएचडीसी की परियोजनाएं यदि लंबी अवधि  की बनाई जाए तो और ज्यादा फायदेमंद रहेगी। कम अवधि की परियोजनाओं में बैंकों को अधिक राशि वापस करनी होती है जिसके कारण परियोजनाओं पर दबाव रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पहाड़ों मे कटान, भूस्खलन तथा भूकंप से जल विद्युत परियोजनाओं का कोई लेना-देना नहीं। इस संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर जांच भी हो चुकी है। यह जल विद्युत परियोजनाएं समाज के लिए वरदान है अभिशाप नहीं। 2019 तक सभी को 24 घंटे सातों दिन बिजली उपलब्ध् कराने की  सरकार का संकल्प है उन्होंने बताया कि कुमाऊँ की धैली गंगा में पहली परियोजना जो 330 मेगावाट की है, वह हमें सौंपी गई है। वहां अन्य तीन परियोजनाएं भी बन रही है। यदि चारों परियोजनाएं प्रदेश सरकार हमें सौंप दें तो हम क्षेत्र में समग्र विकास के लिए और महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में एक योजना रिलायंस तथा अन्य योजनाएं यूजेवीएनएल को दी गई है जिनका इस क्षेत्र में अब तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है जबकि हमारी सरकार से अनुबंध् होने की स्थिति आ गई। डीपीआर बन रही है। सीएमडी श्री सिंह मानते हैं कि जल विद्युत परियोजनाएं अन्य विद्युत परियोजनाओं की तुलना में लाभकारी तथा दूरगामी लाभ देने वाली होगी, शर्त एक ही है कि इनकी अवधि कम से कम 50 साल या उससे अधिक तय की जाए तो परियोजनाओं पर अधिक आर्थिक बोझ नही पड़ेगा। कानून व्यवस्था के कारण जो देरी होती है उस पर भी सरकारें थोड़ा सा ध्यान दे दें तो परियोजना का आर्थिक अनुमान बढ़ेगा नहीं। इस अवसर पर विभागीय वरिष्ट अधिकारी  विजय गोयल, कपिल देव दुबे, डाॅ. एपी त्रिपाठी, गौरव कुमार समेत अन्य टीएचडीसी के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

 

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