देहरादून- उत्तराखंड के चमोली जिले में गलेशियर टूटने से आई त्रासदी ने उत्तराखंड को ही नहीं बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। सात साल बाद उत्तराखंड आज फिर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। प्राकृतिक आपदाओं को आने से रोका किसी के बस में नहीं है लेकिन अगर शासन-प्रशासन चुस्त-दुरूस्त हो तो आपदा के आफ्टर इफेक्ट्स को कम जरूर किया जा सकता है और यह काम उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने बखूबी किया।
चमोली में बीते रोज आई आपदा में जिस तेजी से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सक्रिय दिखाई उसी का नतीजा रहा कि इस आपदा के नुकसान को मिनिमाइज करने की दिशा में सरकार सफल रही। सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सारे कार्यक्रम रद्द कर बगैर किसी देरी के सीधे आपदा प्रभावित क्षेत्र का रूख कर लिया। इसी का नतीजा रहा कि पूरा सिस्टम अलर्ट पर आ गया। मौके पर मौजूद रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हर स्थिति का बारीकि से अवलोकन कर राहत-बचाव में जुटे दलों का हौंसला बढ़ाने का तो काम किया ही साथ ही उनकी मौजूदगी ने यह भी दर्शाया कि अगर ऐसे समय में नेतृत्व सक्रिय हो तो बड़ी से बड़ी आपदा से भी निपटा जा सकता है। देर शाम रैणी से देहरादून लौटने के बाद सचिवालय में भी सीएम ने आला अधिकारियों की बैठक लेकर पल-पल का अपडेट लेते रहे। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर तमाम केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों का भी इस मुश्किल समय में साथ मिला रहा है।



