
शैली देहरादून- कांग्रेस में रानी भाजपा में बाबा जी हां सत्ता की हनक बरकरार रहे इसको लेकर नेताओं के सिद्धांत अक्सर बदल जाते हैं यही वजह है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कई नेता अपने अपने टिकट को लेकर अभी से जुगाड़ बाजी में जुट गए हैं जिनको खतरा लग रहा है वह दूसरी पार्टियों के साथ अपना समन्वय बरकरार रख रहे हैं शायद यही वजह है कि टिहरी सांसद रानी माला राज्यलक्ष्मी शाह के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ मुलाकात के बाद अब नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा भाजपा के कार्य समिति की बैठक में पहुंच गए ।

सूत्रों की माने तों.. 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुत सारे सांसदों के टिकट खतरे में है सत्तासीन भाजपा में जिताऊ कैंडिडेट पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है इसके साथ ही डमी कैंडिडेट को इस बार के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं देने पर विचार हो रहा है टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रानी राज्यलक्ष्मी शाह को भी डमी कैंडिडेट के रूप में जाना जाता है यही वजह है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में किसी और को पार्टी टिकट दे सकती है भाजपा में दाल न गलने की खबर शायद रानी राज्यलक्ष्मी शाह को भी लग गई है यही वजह है कि वह अभी से ही अपने दूसरे विकल्प की तलाश में जुट गई है उसका सबसे बड़ा कारण यही है कि कांग्रेस की ओर से टिहरी लोकसभा सीट के लिए अभी तक कोई दावेदार मजबूती के साथ नहीं दिखाई दे रहा है जबकि भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और उनके पुत्र साकेत बहुगुणा लाइन में खड़े हैं ऐसे में खतरे को भागते हुए रानी ने अभी से ही अपने विकल्प की तलाश शुरू कर दी है और इसीलिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ आम पार्टी के बहाने शिष्टाचार मुलाकात की| दूसरी तस्वीर कांग्रेसी खेमे से आई नैनीताल से पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा के भाजपा कार्यसमिति की बैठक में पाया जाना…. इस बात के संकेत दे रहा है कि केसी सिंह बाबा को 2019 लोकसभा चुनाव के लिए नैनीताल से टिकट नहीं मिलने वाला ..ऐसा माना जा रहा है कि हरीश रावत नैनीताल से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं यही वजह है कि केसी सिंह बाबा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ भी मुलाकात की थी लेकिन उम्मीद हार चुके केसी सिंह बाबा ने नैनीताल से दूसरे विकल्प को लेकर भाजपा के साथ जाने का मन बना लिया है उसकी बड़ी वजह यही है कि नैनीताल से मौजूदा सांसद भगत सिंह कोश्यारी उम्र के लिहाज से अब चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं लिहाजा विकल्प खुला देखते हुए केसी सिंह बाबा ने भाजपा का दामन थामने का मन बना लिया है।

राजनीति में सत्ता की हनक का स्वाद एक बार अगर किसी नेता को लग जाए तो वह पार्टियों की विचारधाराओं को नहीं देखते वह देखते हैं उनका आगे का भविष्य किस पार्टी के साथ पूरा होगा. चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस हालांकि राजनीति में दलबदल तो लगा रहता है …यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही अपने दरवाजे खुले रखे हैं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तो यहां तक कहां है कि जो भी पार्टी के लिए मजबूत नेता हो उसे किसी भी कीमत पर पार्टी में शामिल करें कुछ ऐसा ही विपक्ष में बैठी कांग्रेस की ओर से भी प्रस्ताव खुला हुआ है|



