देहरादून। रिजल्ट खराब हुआ तो व्यवस्था भी खराब हो जाएगी। यह चेतावनी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को मिलने वाली है। अब सरकारी स्कूलों के सही मायने में अच्छे दिन आने वाले है। अच्छे और खराब स्कूलों का चिह्नीकरण जारी है। इसी प्रकार शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों का भी विवरण मांगा गया है। 11 जून को इस मामले की समीक्षा होगी। अब तक उत्तराखंड में विद्या भारती के स्कूलों के बच्चे ही मैरिट सूची में आ रहे हैं, जबकि 50 अरब से ज्यादा खर्च करने वाले सरकारी स्कूलों में व्यवस्था तहस-नहस है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे प्रयासरत है। वह मुख्य शिक्षा अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से जवाब मांगेगे। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा निदेशक आरके कुंवर से 14 बिन्दुओं पर रिपोर्ट मांगी है, जिनमें 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले छात्र, 100 प्रतिशत परिणाम देने वाले स्कूल तथा गत तीन वर्षों से लगातार शून्य परिणाम देने वाले विद्यालयों के साथ-साथ जिन स्कूलों ने 30 से 50 प्रतिशत पद रिक्त है, उनकी भी सूची मांगी गई है। शिक्षा मंत्री विद्यालयों की ओवरहॉलिंग करना चाहते हैं ताकि सरकारी स्कूल निजी स्कूलों की टक्कर में खड़े हो।



