
टायॅलेट एक प्रेम कथा फिल्म की तर्ज पर असल जिदंगी की कहानी सामने आई है इस गावं की औरतों ने ठान लिया है कि इस बार शौचालय नहीं तो दिवाली भी नहीं। यहां कोई फिल्म या कहानी की नहीं बल्कि असल जिंदगी की बात हो रही है, शिक्षानगरी कोटा के नाम से प्रसिद्ध गांव की महिलाओं ने इस साल दिवाली पर बड़ा संदेश सामने लेकर आई हैं। जी हां, उम्मेदगंज गांव की महिलाएं ससुराल में शौचालय नहीं होने के चलते ससुराल की जगह मायके में दिवाली मनाएंगी।
शौचालय नहीं होने से तंग महिलाओं ने सुसराल वालों के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद कर दिया। बताते चलें कि आंदोलन का उद्देश्य है कि पहले घर में शौचालय बनवाओ इसके बाद ही वो ससुराल में दिवाली का पर्व मनाएंगी, नहीं तो गांव की बहुएं इस बार अपने-अपने मायके में त्योहार मनाएंगी।
गांव में शौचालय के लिए अब गांव की बहु मधू के साथ कई महिलाओं ने अपने सुसराल वालों के खिलाफ आंदोलन का आगाज कर दिया है. बहुएं एकजुट होकर खुले में शौच के खिलाफ अपनी आवाज इस अंदाज में बुलंद कर रही हैं कि अब खुले में शौच से मुक्ति चाहिए और इस मुक्ति के लिए उन्होंने अपने सुसराल वालों पर दबाव बनाया है।
महिलाओं का कहना है कि शौचालय नहीं होने से उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब बेटियां भी बड़ी हो गईं हैं, ऐसे में निजता की परेशानी के साथ-साथ असुरक्षा भी डराती है, लेकिन कई बार मिन्नतें करने के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं, ऐसे में अब सुसराल वालों के खिलाफ यह भावनात्मक खिलाफत इस परेशानी से निजात दिलवा दे ऐसी उम्मीद हम कर रहे हैं।
ससुराल पक्ष के लोग अब बहुओं के इस आंदोलन के बाद अजीब सी कमशमश में हैं, ऐसा नहीं है कि गांव में सरकार का खुले में शौच मुक्ति अभियान नहीं पहुचा है, लेकिन उसकी धीमी रफ्तार ने इस साल की दिवाली पर परिवार वालों को घर में शौचालय जल्द बनवाने को मजबूर कर दिया है।



