देहरादून- भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर जनाक्रोश रैली में हजारों की संख्या में कर्मचारियों और मजदूरों ने आज सचिवालय कूच किया। सरकार द्वारा की जा रही अपनी उपेक्षा के विरोध में पहले उन्होनें परेड ग्राउंड में जन सभा का आयोजन किया, और फिर सचिवालय कूच किया। सचिवालय कूच के दौरान इन कर्मचारियों और मजदूरों की पुलिस के साथ तीखी नोंक झोंक भी हुई।
मजदूर संघ द्वारा बुलाई गई इस रैली में प्रदेश के कोने कोने से मजदूर और विभागीय कर्मचारियों ने भाग लिया। इस रैली को 100 के करीब मजदूर और विभागीय यूनियनों का समर्थन मिलने से भारी भीड़ जमा हुई। यूनियनों के नेताओं द्वारा परेड ग्राउंड में आयोजित की गई जनसभा में सरकार के खिलाफ जम कर अपनी भड़ास निकाली गई। यूनियन के नेताओं का कहना था, कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और मजदूरों की कोई बात नहीं सुनी जाती है। सत्ता पक्ष के लोग सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के हितों पर ही ध्यान देतेे हैं, जबकि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के बारे में कभी नहीं सोचा जाता है। आंगनवाडी, आशा कार्यकत्रियों को कई कई महीने तक मानदेय तक नहीं मिल पाता है। वह कैसे अपना गुजारा करती हैं। इस विषय में सोचने वाला कोई नहीं है। यही नहीं समय समय पर सरकारी महकमों द्वारा उन पर कई तरह की अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाल दी जाती है, लेकिन उन्हें जो मानदेय मिलता है वह भी समय पर नहीं मिलता है। दो चार और छह हजार तक के मानदेय में उन्हें अपने परिवार का गुजारा करना पडता है जो एक मजदूर की तिहाडी से भी कम है। असंगठित क्षेत्र में कार्य करने वाले मजदूरों को कभी काम मिलता है तो कभी उन्हें कई कई दिन तक बेकार रहना पडता है। आज की इस रैली में असंगठित क्षेेत्र में काम करने वाले मजदूरों ने बडी संख्या में भाग लिया। उनकी मांग है कि सरकार कम से कम उनकी बात तो सुने। उनका कहना है कि सरकार का कोई भी नुमायंदा उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं है। आज की इस रैली मेें ऑटो यूनियन और ई-रिक्शा वालों से लेकर एनएचएन तक सैकडों गैर सरकारी संगठनों ने भागीदारी की। परेड ग्राउंड से हजारों की संख्या में मजदूर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर बढ़े जहां पुलिस द्वारा बनाये गये बैरिकेटिंग्स पर इन्हें रोक दिया गया। आगेे न बढ़ने देने पर इनकी पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोंक झोंक भी हुई।


