
पहली बार उत्तराखंड सरकार ने नीति बनाने के लिए खनन कारोबार से जुड़े हितधारकों के सुझाव लिए हैं। वहीं कुछ हितधारकों के सुझावों को नीति में शामिल भी किया गया है। जिसके बाद सरकार का मानना है कि वर्तमान में उपखनिज नीति उतनी प्रभावी नहीं हैं| नीति के प्रावधानों को लेकर बहुत से मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। न्यायालय के स्तर से भी सरकार को कई बार दिशा-निर्देश दिए गए हैं…जिसके बाद सरकार ने इन सभी तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर नई नीति लाने की जरूरत महसूस की हैं|
मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू के मुताबिक, नीति का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नीति यूजर फ्रेंडली होगी। सरकार का मानना हैं कि नई खनन नीति यदि प्रभावी ढंग से लागू हुई तो राजस्व में करीब 500 से 1000 करोड़ की वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में जितने क्षेत्रफल पर सरकार खनन के पट्टे आवंटित करती है, उस अनुपात में सरकार को राजस्व प्राप्त नहीं हो रहा है।



