
देहरादून से 12 किमी. ऋषिकेश मार्ग पर स्थित यह सिद्ध पीठ भक्तों के लिए आस्था का केन्द्र है। बता दें कि मन्दिर में प्रत्येक रविवार भव्य मेला आयोजित होता हैं. कहा जाता है कि यह सिद्ध पीठ ऋषि पीठ, ऋषि दत्तात्रेय के चोरासी सिद्धों में से एक है।
स्थानीय मान्यताएं : गढ़वाल राजाओं के शासन काल में डोईवाला एक गांव था। लेकिन रेल लाइन के आगमान के बाद डोईवाला एक बाजार के रूप में बदल गया। गोरखा और गढ़वाल राजाओं के समय डोईवाला देहरादून क्षेत्र में स्थित एक छोटा सा गांव था। जब डोईवाला पर अंग्रजों ने अधिकार किया, तब इस क्षेत्र के आसपास की भूमि पर कृषि कार्य प्रारंभ हुआ और इनका विकास ग्रांट के रूप हुआ। यही कारण है कि डोईवाला क्षेत्र में स्थित लच्छीवाला , रानीपोखरी, भोगपुर और घमंडपुर गांवों के आसपास कई ग्रांट हैं। इनमें मार्खम ग्रांट, माजरी ग्रांट और जॉली ग्रांट प्रमुख हैं। 1 मार्च 1900 को हरिद्वार देहरादून रेल मार्ग पर रेल गाड़ियां चलनी प्रारंभ हुईं। इसी दिन डोईवाला स्टेशन अस्तित्व में आया। धीरे-धीरे ग्रांट के आसपास के क्षेत्र विकसित होने लगे और डोईवाला एक छोटा सा बाजार बन गया।

1901 में डोईवाला में पहला विद्यालय खुला। इसी साल यहां के पहले अस्पताल की भी स्थापना हुई।1933 में यहां जानकी चीनी मिल (रेलवे स्टेशन के नजदीक) स्थापित हुआ। इसकी स्थापना जब्बाल इस्टेट के शासकों और स्थानीय हवेलिया परिवार ने मिलकर किया था। स्व. दुर्गा मल और कर्नल प्रीतम सिंह संधू जैसे वीर स्वतंत्रता सेनानियों की जन्म भूमि भी डोईवाला ही है। गौरतलब है कि ये दोनों नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिन्द फौज की ओर से देश के उत्तर-पूर्वी सीमा पर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े थे। बीते दशक में डोईवाला की बड़ी उपलब्धि रही है- जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के पास “हिमालयन इंस्टीट्यूट अस्पताल” की स्थापना। इसकी स्थापना 1994 में स्वामीराम ने करवाया था। 750 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में प्राथमिक उपचार से लेकर गंभीर बीमारियों तक की आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं। इस अस्पताल से गढ़वाल क्षेत्र के लोग तो लाभान्वित हुए ही है, साथ ही यह उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती भागों के लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं के निदान में भी काफी सहायक सिद्ध हुआ है।

- स्थानीय जानकारों की माने तो भगवान दत्तात्रेय के 2 शिष्यों की निवास भूमि है डोईवाला। यही नहीं, भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने भी यहीं प्रायश्चित किया था।
- स्थानीय प्रचलित कहानी की मने तो योगियों और संतों के महान गुरु भगवान दत्तात्रेय के 84 शिष्य थे, जिन्हें भगवान ने शिक्षा और अपनी शक्ति दी। इनमें से चार शिष्य देहरादून इलाके में ही बस गए।
- बाद में इन चारों के निवास स्थान (लक्ष्मण सिद्ध, कालू सिद्ध, मानक सिद्ध और मंदू सिद्ध) सिद्ध स्थान के रूप में प्रसिद्ध हुए। इनमें से दो लक्ष्मण सिद्ध और कालू सिद्ध डोईवाला क्षेत्र में स्थित हैं।
- ऐसी मान्यता है कि भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण ब्रह्म हत्या के पाप का प्रायश्चित करने के लिए “लक्ष्मण सिद्ध” आए थे।
धार्मिक त्यौहार:- प्रत्येक वर्ष अप्रैल महीने के अंतिम रविवार को लक्ष्मण सिद्ध मंदिर पर स्थानीय मेला का आयोजन होता है। मेले में काफी लोग आते हैं और मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं।





