
भारतीय राजनीति में कुछ नाम बड़ी प्रमुखता से आगे बढ़े हैं। ऐसे ही नामों पंडित हेमवती नंदन बहुगुणा के सुपुत्र विजय बहुगुणा का नाम भी शामिल है। विजय बहुगुणा ने पिछली सरकार में उपेक्षा से क्षुब्ध होकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और उनके साथ ही लगभग एक दर्जन विधायक कांग्रेस से भाजपा में आ गए। इन सबका नेतृत्व विजय बहुगुणा ने ही किया था। इन नामों में जहां पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा स्वयं शामिल थे रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ, खानपुर विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, नरेंद्र नगर विधायक सुबोध उनियाल, डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल, डॉ. हरक सिंह रावत, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, केदारनाथ विधायक श्रीमती शैला रानी रावत आदि के नाम शामिल है। इन लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नेतृत्व में भाजपा का दामन थामा था। अब पिछले कुछ दिनों से विजय बहुगुणा ही नहीं लगभग पूरी टीम हाशिये पर है। इस टीम के बाद श्रीमती रेखा और यशपाल आर्य भी भाजपा में शामिल हो गए। उससे धर्मगुरु सतपाल महाराज भाजपा में शामिल हो गए थे।
भाजपा में शामिल इन नेताओं में डॉ. हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य, श्रीमती रेखा आर्य, सुबोध उनियाल मंत्री के रूप में कार्यरत हैं, वहीं वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज भी मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन विजय बहुगुणा चाहे-अनचाहे हाशिये पर चले गए हैं। उनकी मौन चुप्पी राजनीतिक जानकारों को चुभ रही है। लोगों का मानना है कि जिस ढंग से विजय बहुगुणा ने भाजपा की सरकार बनवाई थी और कांग्रेस को तोड़कर उसे हाशिये पर ला दिया, कहीं वही कार्यवाही दुबारा न कर दें और प्रचंड बहुमत से आयी भाजपा के विधायकों को तोड़कर पुन: कांग्रेस की सरकार न बना दे। हालांकि यह वर्तमान में संभव नहीं दिख रहा है, उसका कारण भाजपा के साथ 57 विधायकों का होना है। अगर इसमें से कुछ विधायक इधर-उधर भी होते हैं तो भी भाजपा की सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वैसे भी राजनीतिक रूप से त्रिवेंद्र सरकार काफी मजबूत सरकार है लेकिन विजय बहुगुणा की मौन चुप्पी लोगों को अखर रहीं है। उनके मन में सत्ता और संगठन को लेकर क्या चल रहा है, यह तो विजय बहुगुणा ही बता सकते हैं लेकिन इन दिनों अफवाहों का बाजार गर्म है जिसके कारण जितने मुंह उतनी बातें हो रही है।



