Sunday, March 1, 2026
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आज से शुरू हो गये है श्राद्ध, अगर आपको तिथि नहीं है याद, तो इस दिन करें पितरों का श्राद्ध……

पितरों के तर्पण का पर्व आज 25 सितंबर से शुरू हो चुका है. भाद्रपद के शुक्लपक्ष पूर्णिमा से पितृपक्ष शुरू होता है और यह अश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक रहता है. इस समय पूर्वजों की शांति और उनकी तृप्ति के लिए पूजा-पाठ कराया जाता है. हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार पितृ दोष के कारण इंसान को कई बाधाओं का  सामना करना पड़ता है. पितृपक्ष के इन 16 दिनों में इंसान अपनी कर्मों को सुधारने और आगे कुल की रक्षा करने के लिए अपने पूर्वजों से प्रार्थना करता है. 25 सिंतबर से शुरू हुए पितृपक्ष
ज्योतिषों की मानें तो श्राद्ध कर्म 25 सिंतबर से शुरू हो रहे हैं. 24 सिंतबर को पूर्णिमा श्राद्ध था. हर महीने की पूर्णिमा और अमास्वया को श्राद्ध किया जा सकता है इसलिए कई जगहों पर लोगों ने 24 सितंबर से श्राद्ध कर्म शुरू कर चुके हैं. लेकिन पितृपक्ष मंगलवार से शुरू होकर 9 अक्टूबर तक चलेगा. पितृपक्ष की पूजा और तर्पण चूंकि दोपहर में किया जाता है इसलिए मंगलवार सुबह से आप पूजा-पाठ शुरू कर सकते हैं. 10 अक्टूबर से माता के नवरात्रे शुरू हो रहे हैं. तिथि नहीं याद तो इस दिन करें तर्पण 
श्राद्ध पर्व इस बार 25 सितंबर से 9 अक्टूबर तक मनाया जाएगा. भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होने वाला श्राद्ध पर्व अमावस्या के दिन समाप्त हो जाता है. जिन लोगों को अपने पूर्वजों की तिथि पंचांग के अनुसार याद नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या 9 अक्तूबर को श्राद्ध कर सकते हैं. ध्यान रहे की धन होने पर श्राद्ध में कंजूसी न करें और धन के न होने पर सनातन धर्म के अमूल्य ग्रंथ विष्णु पुराण के अनुसार वन में या अपनी झोपड़ी में ही दोनों भुजाओं को उठाकर कहें, ‘मेरे प्रिय पितरों, मेरा प्रणाम स्वीकार करें. मेरे पास श्राद्ध के योग्य न तो धन है, न सामग्री. आप मेरी भक्ति से ही लाभ प्राप्त करें.’ यहां कम से कम जल तो जरूर ही अर्पित करें. माना जाता है कि श्राद्ध न करने पर पितर अपने वंशजों को शाप देकर लौट जाते हैं और इसी कारण भविष्य में होने वाली संतानों की कुंडली में पितृदोष आदि देखने में आते हैं.

 

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