
जिस साइकिल के सफर की शुरुआत मुलायम सिंह यादव ने की थी,अब ये साइकिल अखिलेश की हो गई है । अब नजर इस बात पर है कि मुलायम क्या फैसला करते हैं.
मुलायम के पास सबसे पहला विकल्प यह है कि वह कोर्ट जाकर चुनाव आयोग के फैसले पर स्टे की अपील करें। हालांकि इस विकल्प को अपनाने से मुलायम को कोई खास फायदा होने वाला नहीं है क्योंकि आज यूपी चुनाव अधिसूचना जारी हो जाएगी फिर इस मामले में न्यायपालिका के दखल की गुंजाइश बेहद कम होगी।
मुलायम के पास दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि वह अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष मानते हुए संरक्षक की भूमिका स्वीकार कर लें। हालांकि मुलायम इस विकल्प को शायद ही चुनें क्योंकि इससे उनके राजनीतिक संन्यास की भूमिका तैयार होगी और वह इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करना चाहेंगे।
जिस विकल्प की सबसे ज्यादा संभावना नजर आ रही है वह यह कि मुलायम अपने बेटे के खिलाफ चुनावों में जाएं और अलग चुनाव लड़कर जनमत को अपने पक्ष में दिखाएं। अगर वह अखिलेश गुट से ज्यादा वोट और सीटें ले आए तो उन्हें ही असली समाजवादी पार्टी माना जाएगा, पर ऐसा होने की संभावना बहुत कम है



