बड़ी खबर : उत्तराखंड में इन दिनों कई आईएएस अधिकारी अपनी कार्य शैली के साथ साथ जनहित ही जुड़े कार्यो के चलते जनता के चहेते बने हुए है उसमे हरिद्वार के मौजूदा डीएम दीपक रावत की बात करे या फिर रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल की दोनों ही अधिकारी अपनी कार्य प्रणाली को लेकर चर्चा में है

देवभूमि की सेवा के लिए कितने अफसर आये और गए, पर इनमे कुछ ही ऐसे होते है जो लोगो के दिलो दिमाग पर अपनी छाप छोड़ पाते हैं और जिन्हें भूलाना किसी के लिए भी नामुमकिन है, हरिद्धार के डीएम की बात जाए तो तेज तर्रार और साफ छवि वाले हरिद्धार के डीएम दीपक रावत के काम करने का तरीका ही निराला है अभी हाल ही में रक्षा बंधन पर गाया उनका गाना “फूलो का तारो का सबका कहना है एक हजारो में मेरी बेहना है”गाना सोशल मिडिया में खूब पसंद किया गया…बताया जा रहा है कि रक्षाबंधन पर जिलाधिकारी दीपक रावत ने रोशनाबाद कारागार में महिला बंदियों के बीच पहुंच उनसे राखी बंधवाई। महिला कैदी जिलाधिकारी को अपने बीच पाकर भावुक हो गईं। एक महिला बंदी ने जब डीएम से गाना गाने की फरमाइश की तो जिलाधिकारी ने यह गाना गाया। डीएम की सहृदयता देख महिला बंदियों की आखों में आंसू छलक आए। यही नहीं डीएम दीपक रावत ने हरिद्धार में चल रहे अवैध खनन पर लगाम लगाने के साथ साथ भष्टाचार पर अंकुश लगाने लिए कई ठोस कदम उठाए है..

अब बात रुद्रप्रयाग के डीएम की करे तो उनके काम की सरहाना जनता के साथ साथ सरकार ने भी की है रुद्रपयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल अपने रूटीन चेक के दौरान रुद्रप्रयाग के राजकीय गर्ल्स इंटर कॉलेज गए थे, जहां उन्हें स्कूल में साइंस के टीचर के अभाव का पता चला। इस बात से चिंतित मंगेश ने इस बारे में अपनी पत्नी से बात की और अपनी पत्नी ऊषा घिल्डियाल से स्कूल में किसी शिक्षक की तैनाती होने तक पढ़ाने को कहा, पति के इस प्रस्ताव को स्वीकारते हुए पत्नी ने ना सिर्फ अपने पति को सहयोग दिया बल्कि इनके इस कदम से स्कूल की छात्राओं को उनकी साइंस की टीचर मिल गई। निस्वार्थ और निशुल्क रूप से उषा घिल्डियाल कक्षा 9 और 10वीं की छात्राओं को विज्ञान पढ़ा रही हैं. वह प्रतिदिन दो से ढाई घंटे स्कूल में बच्चों की पढ़ाई को दे रही हैं। महेश और उनकी पत्नी का ये सरहानीय कदम वाकई में मिसाल है। यही नहीं हाल ही में डीएम मंगेश रुद्रप्रयाग के ऐसे गांव में गए जंहा आज तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। डीएम मंगेश में गांव में पंचायत लगाकर लोगो की समस्या सुनी और उनकी समस्या का निवारण किया।
उत्तराखंड में ऐसे ईमानदार अफसर की तरह हर अधिकारी लोगो के बीच जाकर उनकी समस्याओ का समाधान कर भष्टाचार पर अंकुश लगाने की मिसाल पेश करते रहे,तो वो दिन दूर नहीं जब प्रदेश विकसित और खुशहाल प्रदेश कहलाएगा।



