
आज हम एक ऐसी औषधि के बारे में बात कर रहे हैं जो कितनी ही बीमारियों को जड़ से खत्म कर देती है “किलमोड़ा”। जी हाँ किल्मोड़ा अब डायबिटीज का पक्का इलाज बनने जा रहा है। खास बात यह है कि अमेरिका से इसका पेटेंट भी हासिल कर दिया है। ये साफ हो गया है कि उत्तराखंड के पहाड़ों में उगने वाले किलमोड़े से अब एंटी डायबिटिक दवाएं तैयार होंगी।
चूहों पर इसका प्रयोग किया जा चूका है जो कि सफल रहा है। इसके बाद इंसान को भी इससे बनी एंटी डायबिटीज दवा दी गई। ये दवा भी कारगर साबित हुई। इसके बाद इसके पेटेंट की प्रोसेस शुरू की गई थी। अमेरिका के इंटरनेशनल पेटेंट सेंटर द्वारा इस दवा का पेटेंट दे दिया गया है। बता दें कि किल्मोड़ा के पौधे कंटीली झाड़ियों वाले होते हैं और एक खास मौसम में इस पर बैंगनी फल आते हैं। पहाड़ के क्षेत्रों में बच्चे इसे बड़े चाव से खाते हैं। आम तौर पर ये पेड़ उपेक्षा का ही शिकार रहा है। इस पेड़ से दुनियाभर में जीवन रक्षक दवाएं तैयार हो रही हैं। किलमोड़ा की झाड़ियों से तैयार हुए तेल का इस्तेमाल कई तरह की दवाएं बनाने में किया जाता है। इसकी जड़, तना, पत्ती, फूल और फल हर एक चीज बेहद काम की है।

विशेषज्ञों की माने तो इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी ट्यूमर, एंटी वायरल और एंटी बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं। डाय बिटीज के इलाज में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा खास बात ये है कि किलमोड़ा के फल और पत्तियां एंटी आक्सिडेंट कही जाती हैं। एंटी ऑक्सीडेंट यानी कैंसर की मारक दवा। किलमोडा के फलों के रस और पत्तियों के रस का इस्तेमाल कैंसर की दवाएं तैयार करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों और पर्यवरण प्रेमियों ने इसके खत्म होते अस्तित्व को लेकर चिंता जताई है। किलमोड़े के तेल से जो दवाएं तैयार हो रही हैं, उनका इस्तेमाल शुगर, बीपी, वजन कम करने, अवसाद, दिल की बीमारियों की रोक-थाम करने में किया जा रहा है। सदियों से उपेक्षा का शिकार हो रहा ये पौधा बड़े कमाल का है। इसलिए लोगों को इसकी उत्पादकता को बढ़ाए रखने पर विचार करना चाहिए।




